रविवार, 31 अक्तूबर 2010

उनकी फितरत है रूठजाने की

फ़िक्र मुझको नहीं ज़माने की 
मेरी आदत है मुस्कुराने की 


एक दिन मेरी जान जाएगी 
उनको आदत है आजमाने की 


मेरी आदत तो  है मनाने की 
उनकी फितरत है रूठजाने की 


तेरे चेहरे ने कह दिया सबकुछ 
कुछ जरुरत नहीं बताने की 


"मीत"उतना ह़ी याद आये है 
कोशिशे जितना कि भुलाने की 


रोहित कुमार "मीत"

2 टिप्‍पणियां:

  1. aap bohot hi accha likhte hai.... :)

    plz settings me jakar word verification hata dijiye...

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  2. फ़िक्र मुझको नहीं ज़माने की
    मेरी आदत है मुस्कुराने की ...........Bahut khub bhai...Basant lal 'chaman' nagmechaman.blogspot.com

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